बचपन की तस्वीर मैं अब धूमिल हो गए हैं ,
अब हम बड़े हो गए हैं ,
हम काबिल तो कभी थे ही नहीं , बेपरवाही से नाता था
हमारा , की अब हम जिम्मेदार के नाम से मशहूर हो गए हैं !
कहते थे की , जवानी मैं हैं मौज कितने , और बचपन एक पक्षी पिंजरे मैं ,
और अब , जवानी मैं कितने मजबूर हो गए हैं ,
देखो अब हम बड़े हो गए हैं !
ये सिसिला कठिन कितना है , वो कल ही नहीं जो
अपना है , हम मषलूम हैं खुद को , वो बनजाने मैं
और जो कभी चाहा नहीं आज वो बन गए है
देखो हम बड़े हो गए है
वो शरारते वो यार दोस्त , अब दूर हो गए है
और हम भी इस भीड़ मैं कंही गुम हो गए है ,
किसपे करें भरोशा ,ये मालूम नहीं होता ,
सभी दो चेहरे लगाकर खड़े हो गए हैं...
देखो हम बड़े हो गए हैं
वो मुसकान थी मासूम कितनी , चर्चे अब नहीं होते हैं ,
सिवाए दिखावे के , खुश अब कभी नहीं होते हैं
क्या खो दिया है मैंने ,ये कोई नहीं पूंछता
ऐसे चाँद सवाल मेरे जहन में पडे सड् गए हैं
देखो हम बड़े हो गए हैं