कोई पत्थर की मूरत थी

जिसे मैं तोड़ आया था

कोई डर ना था ईश्वर का

पर बदल डाला नजरिया था


हमारा ही सामाजिक बंदिशों ने

खूब डराया दुनिया केही भक्तों ने

मगर इरादा ना बदला था

अपने ही परचम लहराने का


इंडिया शत प्रतिशत...थी

प्रतिमाओं में छुपे राज थे

जिसे मैं ना समझ पाया

फिर दौड़ चला घर आया था।

~विक्की कुमार