मैं अपने जज्बात मां के नाम लिखता हूं

मेरे मुल्क की बात मां के नाम लिखता हूं

दुनिया ने तो मुझको छला है इसलिए तो

मैं पहली मुहब्बत मां के नाम लिखता हूं।


चांद तारों की छांव में , मां के गांव में

ततैये के डंक,मां के आंसू हरे घाव में

नहीं लगती मुझे भूख प्यास तेरी गोद में

मुझे जाना है तेरे संग सपनों की नाव में

मैं अपनी हिफाजत मां के नाम लिखता हूं

मैं पहली मुहब्बत मां के नाम लिखता हूं।


जब उम्मीद टूटे,आती-जाती सांसें छूटे

यमराज से लड़ने खड़ी थामे रही वो हाथ

मुझे ईश्वर,रब,अल्लाह नहीं मिला मगर

सबसे अनमोल रत्न मिला,मां का साथ

मैं अपनी हर रात मां के नाम लिखता हूं

मैं पहली मुहब्बत मां के नाम लिखता हूं।


तेरे आंख से बहे आंसू मोती है इसे उठाऊं

तु ही पालनहार तेरे जैसे रिश्ते मैं निभाऊं

तेरी थाली और लोरी सुनाते थपकियों में

फिरसे आज तेरे आंचल में बच्चा बन जाऊं

मैं अपनी शराफत मां के नाम लिखता हूं

मैं पहली मुहब्बत मां के नाम लिखता हूं।

~विक्की कुमार

स्वरचित व मौलिक(नई दिल्ली)