वह सभा जो जनता की पुकार उठाए ही ना तो फिर उसे दरबार क्या कहना

तानाशाही पड़ोस परिवारवाद हो तो फिर उसे जनमत सरकार क्या कहना

जब कीमती दुभर देशरत्न मलयज-सा हरा हीरा रह-रह कर बेमोल बिक गया 

जहाॅं हर रोज एक सी- खबरें हो दबावों में तो फिर उसे अखबार क्या कहना?

~विक्की कुमार