हृदय गति छूटे तो, अंतिम सांस रुठे तो

मत मान मन को हार यदि आस टूटे तो

आशा का गीत दीपक जलाकर गाना है

क्रांति का गीत बिगुल बजाकर गाना है।


सांसें अधिक है हवा की कमी हो गई

कंठ सूखा-सूखा बूंदें तुम भी खो गई

कुछ पानी, कुछ आक्सीजन खरीद लो

मौत की कीमत से कुछ प्राण खरीद लो

हंसी मर चुकी, इसको हंसाकर पाना है

आशा का गीत दीपक जलाकर गाना है।


हमने पकृति को कंक्रीट के आवास चढ़ाया

पेड़,पौधे,पशुओं सभी को व्यवसाय बनाया

विज्ञान की प्रगति , मंडराया मनुष्यता पर

विपदा आन पड़ी असभ्य की सभ्यता पर

पतझड़ किया है अब बसंत बहार लाना है

आशा का गीत दीपक जलाकर गाना है।


काल कौतुक समय को पढ़ रहा है

प्रलय का दौर सुपथ को चढ़ रहा है

आपदा अवसर की ओर निरंतर अग्रसर

सारी संवेदनाएं शून्य लय के पथ पर

इस काल के कपाल को हराकर जाना है

आशा का गीत दीपक जलाकर गाना है।

~विक्की कुमार