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वसंत


माँ ने ख़ुद को संभालते हुए कहा,ठूठ पड़े आम के वृक्ष पर मंजर आने लगे हैं!यह नितांत पीड़ा और अभाव में,इकलौती संबल प्रदान करती हुई,मार्मिक और दैवीय घटना है।

— विक्की आनंद(कैप्टेन)
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