माँ ने ख़ुद को संभालते हुए कहा,ठूठ पड़े आम के वृक्ष पर मंजर आने लगे हैं!यह नितांत पीड़ा और अभाव में,इकलौती संबल प्रदान करती हुई,मार्मिक और दैवीय घटना है।