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सड़क और साँझ


स्ट्रीट लाइटकी गाढ़ी पीली रौशनी से सजी,सड़क और साँझ,

हमारी तुम्हारी बेकरारीकी ख़ुमारी का बोझ लिएबढ़ती,सड़क और साँझ,

यूॅं ही मिल जाए हम भीउस चौराहे,मिलेंगे जैसे वहाँ बेताबसड़क और साँझ।

— विक्की आनंद 'कैप्टन'
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