चलो आपके साथ चलें,

दूर तक इंसानों के पद्चिन्ह न हो, वहाँ।


हवाएं भी पत्तियों को न हिला सके,

किसी पेड़ की छाया भी न हो, वहाँ।


पानी सा कोई मौसम ही न हो,

बस दरारें हो किसी जलाशय में पानी न हो, वहाँ।


चलो आपके साथ चलें,

दूर तक इंसानों के पद्चिन्ह न हो, वहाँ।


- विक्की आनन्द (कैप्टेन)