प्रेम में, परस्पर सहमति की परंपरा,प्रेम के, प्रस्ताव की,स्वीकृति तक ही सीमित है,उसके बाद,दोनों,एक दूसरे पर अपनाअधिकार समझते हैं।
प्रेम में, परस्पर सहमति की परंपरा,प्रेम के, प्रस्ताव की,
स्वीकृति तक ही सीमित है,उसके बाद,
दोनों,एक दूसरे पर अपनाअधिकार समझते हैं।