यूॅं ऑंसूओं से वक्त को लिखा करोगे
किसी के बाद किसी की याद भी कितना करोगे
कहो अच्छा हुआ जो भी हुआ
बुरा कह-कह के भी बुरा भला कितना करोगे
ज़ेहन में और कुछ आए न आए
जो बातें आ चूॅंकि वो ही महज़ कितना करोगे
कोई रास्ता भी जिस तरफ़ जाता नहीं हो
उधर को दौर भी जाओ सफ़र कितना करोगे
- विक्की आनंद 'कैप्टन'
