मैं कुछ भी नहीं हूॅं ये कहते हुए
गुमां है मुझे ऐसा कहते हुए

मोहब्बत की कोई नई दास्तां
मैं झूठा लगूंगा ये कहते हुए

वही एक लड़का वही एक लड़की
बिछड़ गए मोहब्बत में रहते हुए

और कोई बगावत न धड़कन ने की
बस ठहर गई विदा अब ये कहते हुए

हैं दुनिया के रिश्ते ये दुनिया के नाते
सब गुजर जाएंगे सबके रहते हुए

तुम कितने बड़े हो तुम भगवान हो
अगर हो भी तो सबके रहते हुए

मैं कुछ भी नहीं हूॅं ये कहते हुए
गुमां है मुझे ऐसा कहते हुए

- विक्की आनंद 'कैप्टन'