बड़े खुश हो कि महफ़िल में बड़े शायर बुलाए हैं
अरे दीवानों तुम्हें तो सफ़ में ओहदे से बिठाए हैं

ज़रा देखो वो आगे बैठने वालों को तुम
बड़े वो खानदानी है बदन ढक कर है रखा और फिर पश्मीना चढ़ाए हैं

मेरे मालिक मेरे आवाम की ज़ीनत मेरे कान्हा 
ये इंसानों की बस्ती है तो क्यों राजा बनाए हैं

शहर भर में पसरती ख़ामोशी व असीमित अंधेरों में
किसी बच्चे ने बुझते एक दिए की लौ जलाए है