इस आत्ममुग्धता के दौर मेंया तो आप सच्चे हो सकते हैं या फ़िर दोस्त,अब मैं किसी का दोस्त न हो सका,सो सच्चा हो गया।
इस आत्ममुग्धता के दौर मेंया तो आप सच्चे हो सकते हैं या फ़िर दोस्त,
अब मैं किसी का दोस्त न हो सका,सो सच्चा हो गया।