राम ने अवध से ली थी विदा भावना के बाढ़ आंशू गिर रहे थे संपदा की चाह भी दिल मे नही थी आँशुओ से अवध की झांकी सजी थी।   मछलियों ने प्रेम में सबकुछ भुलाया प्रेम जीवन पर पड़ी है एक माया माया ने छाया को भी आंशू दे दिए थे पर राम अपने साथ मर्यादा लिए थे।