Poetry 1 min read 781.8K reads

तुम्हारे बिना


हुनर जीने का आ जायेतुम्हारे बिना?ये मुमकिन नहीं।ये जीवन फिर से जगमगायेतुम्हारे बिना?ये मुमकिन नहीं।रेत की तरह उड़ रहे हैंइधर से उधरनदी की तरह रास्ता बना लेंतुम्हारे बिना?ये मुमकिन नहीं।

Read more Earn more Learn more