यूं ही मायूस बैठे रहने का इरादा है
या कुछ तो कहोगे
कुछ तो चहचहा दो
या अब मौन ही रहोगे
क्या कहा करते थे,
कुछ याद है?
या सब छोड़ कर भूल सभी कुछ
निःशब्द बैठे रहोगे
ये जल रही लाशें
रोज जलेंगी, नयी नयी
कब तक अश्रु बहाकर
भूत में पड़े रहोगे।
जिंदा में जिंदगी में व्यस्त थे
उसी का अफसोस है?
जाने वाला गया, फिर कब तक
खालीपन को महसूस करोगे।
एक हाथ दे देते, उस समय,
खुशी खुशी चार कंधों पर सवार होकर जाता
पर नहीं, मैं भी ऐसा ही था
मैं दिया जो अपनों को
तुम भी तो वही करोगे।
अब छोड़ो ये नादानी
उठो कुछ काम करो
खोलो मौन व्रत अपना
चिता से कुछ तो बात करोगे।
