ऐ माज़ी (अतीत )अब छोड़ दे पीछा मेरा
तू खड़ा है वहीं और ज़िन्दगी
बहुत आगे बढ़ आई है
मुड़ के देखूं तो दिल में हूक सी उठती है
की तो तुम ने मेरे साथ बेवफाई है
ये अलग बात है कि मैंने संभलना सीख लिया
यहां तक आने में ठोकरें तो बहुत खाई है
मेरे कदमों के साथ मेरी उम्र भी बढ़ आई है
की तो लड़कपन ने मेरे साथ रुसवाई है
रिश्तों का बहुत शोर तो है हर जानिब
पर दिल में मेरे बेशुमार तनहाई है
बेमुरव्वती टूट के बरसती है सुनो
देख आंखों ने शरम खाई है
ऐ मेरे माज़ी छोड़ दे पीछा मेरा
अब तेरे तसव्वुर ने भी घुटन मेरी बढ़ाई है
जब से छिटक हाथ तेरा बढ़ गई आगे
सुकूं की इक पल ना रहनुमाई है
मैं इस गुमां में हूं, तू कर रहा पीछा मेरा
पर आस तेरे पीछे की मैंने खुद लगाई है
ऐ माज़ी सुन , छोड़ कर न जाना पीछा मेरा
तेरी यादों ने सांसें तो मेरी बढ़ाई है
वेणु
