माँ, बस तुम हो,
दरिंदों के बीच खुदा तुम हो.
जब उदासी छाती है,
ज़वाब है, तुम कहीं गुम हो.
मेरी ख़ुशियों का 'बहाना' तुम हो,
मेरे आंसुओं का 'छुपाना' तुम हो.
जीवन अगर रामायण है,
तो उसमें छंद तुम हो.
और अगर महाभारत है,
तो उसमें गीता तुम हो.
पापा की डांट से बचाना तुम हो,
गैरों से लड़ाई में पक्ष लेना तुम हो.
छोटी छोटी बातों को Mind करना तुम हो,
वहीं, बड़ी बड़ी गलतियों को Ignore करना भी तुम हो.
मेरे रुक जाने का डर भी तुम हो,
और आगे बढ़ने का हौंसला भी तुम हो.
बस और शब्द नहीं हैं मेरे पास,
क्योंकि मेरे शब्द भी तुम हो,
और शब्दकोश भी तुम हो.


