तुम्ही तो भीङ से हिंदू को एक- एक छांटते जाते,

ज़हर से जो सनी हसिया गले में टांगते जाते।

दरिंदे इस तरह देखो उतर आये दरिंदगी पर कि,

पूछकर नाम हिंदू का गले बस काटते जाते।।


भला किस भूल में बैठे हो अबकी माफ़ कर देंगें,

तुम्हारा वहशीपन अबकी सुपुर्द- ए- ख़ाक कर देंगें।

जो बैठे पार शरहद सुनो आकाओं! दरिंदो के,

उठा जो हाथ में फरसा चमन से साफ कर देंगें।।

- Shailesh Mishra "वीर जी"