वक्त बदला, मायने बदला, जिंदगी तेरे कायदे बदले । कभी कठिनाइयों पर विजय, कहा जाता था संघर्ष । पर हालात के दायरे,कुछ यूँ बदले, के सपने तो हो गए पसत, एक-एक दिन कुछ यूँ हुआ संघर्ष । अब दो रोटी मेहनत की , छाँह घनेरी एक कमरे की । औलाद का बस्ता हो काँनवेंट का, ना हो दरवाजे पर किसी, लेनदार की दस्तक  । बस इतने में ही हुए मस्त , यही जीत है,यही संघर्ष ।