कौन बनेगा शिव ? कौन पियेगा हलाहल , कौन लड़ेगा इस प्रदूषण से जंग ? माँ कहने वाले ही पल -पल , इस धरती को दे रहे मृत्युआलिंगन थी कभी छठा निराली,अनुपम, भींनी-भींनी सुगंध और भौंरों का गुंजन। अब तो प्रकृति कर रही क्रंदन, कौन बनेगा मेरा रक्षक ?