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खुदा


दिल से मायूस हूँ,जिंदगी से नहीं । उठ चुका है भरोसा खुदा से , बंदगी से नहीं। तलवार की धार पर चल सका है कौन ? पर चाकू के नोंक पे जिते है सभी ।

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