हे अनुज उठो,
करुण पुकार सुनो जलमगन हुई धरा,
करुण रूदन है मचा।
डूबा वन उपवन ,
विलिन हुआ घर -बार ।
हर तरफ है सैलाब,
बढ़ाओ मदद के हाथ ।
चलो मनुज चलो ,
प्रलय की आहट सुनो ।
बचायें अनमोल मुस्कान,
दाने-दाने को जो हो रहे मुहाल ।
कर जो तुम्हारे देंगे साथ ,
तो पायेंगे वो जीवन की सौगात ।
अन्न, वस्त्र का उपहार,
देकर बचायें जीवन महान ।
संकट चाहे कितना भी हो विशाल
मनुष्य ने ही किया मनुष्य का उद्धार ।
हे अनुज उठो, करुण पुकार सुनो ।