ये खबर नहीं थी हमें, जिसके इश्क में मगरूर है इतने, ऐसी बेदिली से अलविदा कह जायेगा । वफा की कसमें खाते - खाते, बेवफाई के नगमें लिख जायेगा। दिवानगी का आलम क्या कहें , दर-बदर ढूँढते रहें उसे । मालूम न था दिल में रहते-रहते, गुमशुदा एक दिन वो हो जायेगा। साथ चलते -चलते राह में , खामोशी से यूँ अलविदा कह जायेगा।