सन्नाटे से कांप रही हैं सारी रूहें
और तुम कहते हो मुल्क में बड़ा शोर है
मुश्किलों में हैं जान के असबाबो इमदाद
और तुम कहते हो खैरियत सब ओर है
लाश लटकी मिली है सड़कों पर अहल की
और तुम कहते हो तरक्की बड़ी ज़ोर है
लोग टूट खाते एक दूसरे को दुनिया में
और तुम कहते हो सिर्फ दश्त में आदमखोर हैं
