स्त्रियों का अस्तित्व जल जाता है
तेज़ाब की बूंदों से...
मोह और प्रेम दोनों के बीच उलझ जाता है....
कोई राह चलता नोच लेता है
खूबसूरती को...
कोमल होना कितना श्राप ग्रस्त है
लाचारी से चीख रही तेज़ाब से जली स्त्री वही बता सकती है
तेजाब से भी गहरा घाव दे जाती
है लाचारी...
@vasu rajak
