जय माता दी बोल कर
निकल थे दिल खुल कर।
दर्शन मां ने दिया अनोखा
रास्ते में खाएं थे धोखा।
शपथ किसी ने खाई देखो।
किसी ने मार था ,वहां चौका
टूट गया किसी का घरौंदा।
बिखर गया सब कुछ
एक पल में ।
गूंज रही थी चीखे पर वन में।
चीखें घाटियां दुहराती थी।
दर्द वतन का बतलाती थी।
लाशों पे सपने सजाने वाले।
बहुत बेरहम है मुल्क जलाने वाले।
आग में पूरा देश जलाया ।
आतंक कैसा शहर में आया।
आओं मिलकर हाथ उठाएं
आतंक को इस देश मिटाएं।
यात्राओं को सुरक्षित बनाएं
आतंक पर नकेल लगाए।
