सड़े टमाटर महंगाई में

सेब बेचार लूल पड़ा है।

हरी सब्जियां चिल्लाती हैं

आलू चलो हो गया है ।

नाक बहती भिंडी बोली

इतनी जल्दी बड़ी हो रही?

लौकी बहना क्या हुआ है ।

लौकी चुप - चुप मुस्काती है।

कद्दू राजा से बातलाती है ।

कद्दू जी हंसते मुस्काते चोरी से थोड़ा शर्माते।

बैगन भैया गाड़ी लाओ जल्दी मंडी पहुंचाओं।

भाव हमारा अच्छा लगवाओ।

मण्डी में जब कद्दू पहुंचा

लाला जी फिर टपक पड़े हैं ।

कद्दू राजा को लपक पड़े है।

भिंडी नाक सुकोड़ी इतना ।

कद्दू है क्यों सबके अपना ?


#वसुंधरा कुमारी रजक