चांद
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कल चांद से मेरी बात हुई
ख्वाबों से दो दो हाथ हुई।
लड़ गई मैं अपनी किस्मत से
आंखों से मुसला धार बरसात हुई।
"मैं भीगी हूं चतुराई में ,
अपनों बेपरवाही में।
मेरे चांद सलोने प्यारे से..
तू हट कर मुझसे मिलने की।
हर बंदिशें तोड़ कर आऊंगी
तेरी दुनिया में बस जाऊंगी।
तारों सा साथ निभाऊंगी
मैं लौट के घर न जाऊंगी।
मेरे चांद सलोने प्यारे से
तू हट कर मुझसे मिलने की।
- @वसुंधरा रजक

