अगले बरस हम भी झूमेंगे,
रंग गुलाल हम भी खेलेंगे।
आंखों में होंगे खुशियों के आंसू,
बरसाने में हम भी नाचेंगे।
अगले बरस हम भी झूमेंगे...
गालों को हम भी चूमेंगे।
पंखुरियो की ओट में छिपकर
सजन को हम भी ताकेंगे।
प्रीतम आयेंगे कल परसों
याद में उनके बीते बरसो।
दिवाली बीती , होली बीती
अब तो बितेंगे हर मौसम।
उनकी आशा में तड़प रही हूं
मोती आंखों के परख रही हूं।
अगले बरस हम भी झूमेंगे
गलियों में रंग लेकर घूमेंगे।
Vasu रजक...
