अब हो नहीं सकता वो, अब कुछ खो नहीं सकता वो,
हर एक कशिश खत्म हुई, अब लौट नहीं सकता वो।
​जादू से भरा यह जहाँ है, पर कहीं हँस नहीं सकता वो,
गम हर एक कोने में है, पर रो भी नहीं सकता वो।
​क्या करे... अगर करना भी चाहे, कुछ कर नहीं सकता वो,
यह कौन है जो इतना तन्हा है?
जो मेरे अंदर जिंदा है... आखिर कौन है वो?