
मन सुमन समर्पित हैं प्यार की इनायत पर, रूठना-मनाना सा फिर वक्त की शिकायत पर, तो ज़िंदगी के हर पल में तुमको देख आया हूं, ज़िंदगी के हर कल में हमको देख आया हूं।
सांसों की चुभन में एक मीठा दर्द बहता है, दिल पिघल पिघल रो ले पर होंठ से न कहता है, आंख कसमसाई है फिर मन ने आकर रोका है, दूरियां नहीं होती ये बस नज़र का
Read More! Earn More! Learn More!
