मन सुमन समर्पित हैं प्यार की इनायत पर, रूठना-मनाना सा फिर वक्त की शिकायत पर, तो ज़िंदगी के हर पल में तुमको देख आया हूं, ज़िंदगी के हर कल में हमको देख आया हूं।
सांसों की चुभन में एक मीठा दर्द बहता है, दिल पिघल पिघल रो ले पर होंठ से न कहता है, आंख कसमसाई है फिर मन ने आकर रोका है, दूरियां नहीं होती ये बस नज़र का धोखा है, नैनों के सूखे जल में संगम को देख आया हूं, ज़िंदगी के हर कल में हमको देख आया हूं।
प्यार ने सिखाया है जीते जी ही मर जाना, अपने दिल की हर चाहत यूं ही कुर्बान् कर जाना, प्यार को यूं तुम अपने नफ़रत जता नहीं सकते, बहते अश्रुमोती को पानी बता नहीं सकते, तेरी नफ़रत में भी अपनेपन को देख आया हूं, ज़िंदगी के हर कल में हमको देख आया हूं।


