मैं आकृति बनाता हूँ

पर यह आकार नहीं ले पाती है

जिन्होंने मुझे बनाया

एक चौबीस वर्ष का इंसान

वह मेरी माँ

वह जानती है मैं कवि हूँ

यह कवि मेरी माँ है

मैं उनकी लिखी हुई कविता!


कविता में आत्मजा शब्द

अपनी देह की ट्रूकॉपी है

चौबीस वर्ष बाद

वह भी लिखेगी कविता

एक माँ होना।


मेरी माँ अड़तालीस की हैं

पिता पचास।


वरुण सिंह गौतम

२ मार्च २०२५