रूह फट जाती है जब दरकती ज़मीं पर नजर जाती है

अपनी  ताक़त  पर कुदरत  किस  कदर  इठलाती  है

जो इन्सान पहाड़ों के सीने चीर कर भी राह बना लेता है

कुदरत के थपेड़ों में उसकी हैसियत बुलबुला बन जाती है

 

#joshimathcrisis 

© वरुण चौधरी अंतरिक्ष