तुझे ही गले लगाकर, तेरी ही शिकायत करने का मन करता है। तुझे भुलाकर तेरी ही यादों में खो जाने का मन करता है।। रूठना भी तुझसे है मगर, मनाऐ भी तू ही कैसी ये आरज़ू करता है। कुछ ना बोलूँ, फ़िर भी तुझसे खूब बातें करूँ, कैसे ये ख्वाब देखता है । तुझसे आँखें भी मिलाएँ तो नज़रें झुकाकर? जीना भी तेरे संग है, तू सामने आ जाऐ, तो सांसो को थामे रखना भी एक जंग है।। कुछ पल सुकूँ के तेरे संग बैठ कर बिताने भी है, पर तेरे करीब आने पर, रूह का अंदर तक काँप जाना भी लाज़मी है। दूर हूँ तुमसे, पर कैसे, हवाओं में खुशबू भी सिर्फ तुम्हारी ही है? पल जो साथ बिताए थे हमने, हसीं तो बहुत थे, पर देखो ना, याद करते ही आँखो में सिर्फ पानी ही पानी है।।
