तुम्हारे नाम के आगे की,
साजन वो हरी बिंंदी।
लगे प्यारी, बड़ी प्यारी
साजन वो हरी बिंंदी।

लगे  तुुम ऑनलाइन हो
कि   हमसे मिलने आए हो,
लुभाती है बड़ा मन को
साजन वो हरी बिंंदी।

दिन पूूरा बिता डालूँ,
रातें भी गुजर जाएँँ।
होठों से हँसी ले ले
साजन वो हरी बिंदी।

पड़े  सूूखे मरूूूस्थल पे
रसवर्षा सी कर जाए।
लगे  प्राणों से भी प्यारी,
साजन वो हरी बिंंदी।

तुम्हारे नाम के आगे की
साजन वो हरी बिंदी।
लगे प्यारी, बड़ी प्यारी साजन वो हरी बिंदी।


हरी बिंदी से अभिप्राय
फेसबुक से है।

- वर्षा अग्निहोत्री
स्ववरचित,मौलिक
सर्वाधिकार सुरक्षित