उसकी नज़र में खो सा गया हूँ.. 

देखता हूँ खुद को, अब उसकी नज़र से.. 

वो मुस्कुराएं तो हँस देता हूँ.. 

और हो जो उदास वो, तो रो भी देता हूँ.. 

उसकी नज़र में खो सा गया हूँ.. 

मेरा हर पल हर एहसास अब बस उसके लिये है.. 

जीवन की हर एक आस अब बस उसके लिये है.. 

उसकी नज़र में खो सा गया हूँ.. 

जब नज़र देखती है उसकी मुझे.. 

पाता नहीं तन्हा मैं खुद को.. 

कमी तब कोई, नहीं रह जाती.. 

पूर्णता का एहसास दिलाती वो मुझको.. 

उसकी नज़र में खो सा गया हूँ.. 

प्रफुल्लित सा मन भी पा लिया हूँ.. 

हर पल हर घड़ी खुशियाँ मिल जाती

उसकी नज़र में जो खो सा गया हूँ.. 

उसकी नज़र में बस खो सा गया हूँ.. 


... वारिद कुशवाहा