कोई अपना भी है, लगता है ऐसा..

सुनता है जो हर अक्स मेरे...

बेरंग सी थी यूँ अपनी दुनिया..

तुमने आकर यूँ रंग भरे..

इक मौन सा था यूँ अपना जीवन..

तुमने ही तो हर शब्द गढ़े..

कोई अपना भी है लगता है ऐसा..

सुनता है जो हर अक्स मेरे...

तेरा शुक्रगुजार रहूँगा सदा..

जो जीने के तुमने ढंग दिये..

याद रहेंगे हर पल ये सदा..

जो संग में तेरे जी ही लिए..

कोई अपना भी है लगता है ऐसा..

सुनता है जो हर अक्स मेरे... 


... वारिद कुशवाहा