काश कि मैं इक टैडी होता..
दिल के उनके पास मैं रहता...
उनकी मखमली बाहों में छुपकर..
उनके दिल की बातें सुनता..
काश मै यूँ इक टैडी होता..
सीने पर उनके मैं सोता..
और चुपके से पुच्ची भी करता..
जी भर उनसे बातें करता..
टुकटुक उनका रूप यूँ दिखता..
काश कि मैं इक टैडी होता..
गम सारे उनके मैं हर लेता..
सारे आँसू मैं पी लेता..
इक प्यारा साथी उनका बनकर..
संग में उनके हरदम रहता..
काश कि मैं इक टैडी होता..
और जब वो खुश होते तो शायद..
प्यारी मिठी पुच्ची पा लेता..
काश कि मैं इक टैडी होता..
दिल के उनके पास मैं रहता...
... वारिद कुशवाहा


