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कदम निशाँ मैं ढूँढ रहा हूँ

कदम निशाँ मैं ढूँढ रहा हूँ.. 

किस ओर ये जाते, खोज रहा हूँ.. 

मेरा दिल भी तो खाली ही था.. 

दो पल तुम यूँ ठहर ही जाते.. 

बंजर सा दिल तब तो मेरा... 

खिल उठता इक उपवन जैसा.. 

ठहर यूँ जो तुम दो पल जा

Tag: poetry और2 अन्य
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