सुनो,


कभी कभी मै चाह उठता हूं खुद ही,

गलती कर जाना।

मुझे तुम्हारी डांटते हुए झुकी नजरे,

कांपते होंठो से बहुत मोहब्बत है ।।


चाह उठता हूं कि बीत जाए ये सर्द रातें,

रौशनी में चांद की।

मुझे कांपते हाथो से छुपा लेने,

सीने से लगाने से बहुत मोहब्बत है।