हार गए हो
थक गए हो
रुकना चाहते हो
फिर भी चल रहे हो
इस उम्मीद में कि सब सही होगा
इस आस में कि फिर जी लगेगा
इस कोशिश में कि ये रात भी ढल जाएगी
इस ख्वाहिश में कि फिर खुशी का सूरज चमकेगा
तो सुनो
ना रुकना, ना झुकना, ना हार मानना
ये रफ्तार तुम्हारी है
धीमी जरूर है
पर नाकाबिल नहीं
बस ये सच है तुम्हे जानना


