मैं हूं ना


 आज कोई बात नहीं

 नहीं कोई मशवरा

 मेरा हाथ है तुम्हारे हाथ में

 बस ये याद रखना सदा


 आज मेरे शब्दों से ज्यादा

 मेरी खामोशी ही प्रभावी है

 चला जाएगा यह दौर भी

 जो आज हम पर हावी हैं


 अगर अकेलापन लगे तो

 मेरे स्पर्श को महसूस कर लेना

 तुम मेरी जिंदगी के मायने हो

 ये आकर मेरी आंखों में पढ़ लेना


 अपने लिए नहीं मेरे लिए

 लड़ना है तुमको हर तूफान से

 तुम और मैं सफल होंगे

 जीत लाएंगे जिंदगी हर इम्तिहान से


 यह तूफान जो गुजर गया

 फिर वह किनारा अपना है

 गम के बादल जो छंट गए

 वह चमकता सितारा अपना है


 पतझड़ के गुजर जाने के बाद

 बहार का नजारा अपना है

 फिर जिएंगे वह जिंदगी जो

 हम दोनों का प्यारा सपना है


 वनिता गोलछा