बेटियां


 एक छोटे से अक्षर से कब

 एक लंबी कहानी हो जाती है

 बेटियां वाकई में बहुत जल्दी 

सयानी हो जाती है 


 छोटे छोटे हाथों से 

उंगली पकड़ कर चलने वाली

 कितनी जल्दी हो जाती है 

पंख लगा उड़ने वाली 

मां के जिगर का टुकड़ा 

पिता की राजकुमारी

 बिन बताए ही समझती है 

अपनी सारी जिम्मेदारी

 होठों की दुआएं ले 

 आंख का पानी हो जाती है

 बेटियां वाकई में बहुत जल्दी 

सयानी हो जाती है 


छोटी-छोटी मांग को लेकर

 मुझसे रूठने वाली

 पर सब को संभालते हुए 

खुद न टूटने वाली

 कैसे अपनी गृहस्थी के

 हर दुख को छिपा जाती है

 सूनी आंखों में आंसू दबाए

 चेहरे से मुस्कुरा जाती है

 मासूम, निश्छलता चंचलता से 

त्याग समर्पण की निशानी हो जाती है

 बेटियां वाकई में बहुत जल्दी

 सयानी हो जाती है


 वनिता गोलछा