
मैं चाहती हूँ ....
मैं चाहती हूँ तुमसे सीख लूँ कश्मीरी और फूलकारी कढ़ई करना साङी/ दुपट्टे पर रंग बिरंगे धागों से रच दूँ फूल पत्ती, चिङिया, पनिहारिन और संपूर्ण प्रकृति
मैं चाहती हूँ तुमसे सीख लूँ सुंदर सुंदर से लोकगीत जो तुम अलग अलग अवसरों पर गाती थी उकेङी* पूजन पर भी तुम्हारा वो गीत कचरे/ गंदगी में भी ईश्वरीय अनुभूति करा जाता था
मैं चाहती हूँ तुमसे सीख लूँ खूबसूरत से मांडने मांडना देवी के पगलिए और चौक
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