माँ
तू कहाँ है
चली कहाँ गई है
छोड़ के मुझको
लौट के आजा वापस
मत देना तू रोटी
अकेली है तेरी बेटी
अँधेरे से डर है लगता
अपने ही घर में
दिल है कँपकपाता
दरवाजा जब है खूलता
धकधक धकधर दिल ये करता
माँ
ये क्यों होता है सब
निगाहें इनकी
क्यों लगती है इतनी गंदी
क्या बिगाङा है मैंने इन सबका
माँ
क्या डरते थे ये सब
मेरे पास तू रहती थी तब
अब आ माँ
लौट के आ
तुझसे
नहीं मांगूगी सब्जी पुङी
मत लाना बिंदी और चुङी
पर माँ
अब तो तू आजा