बालों की सुंदरता इसी जद्दोजहद में जिंदगी का बङा टुकङा निकल जाता है एक लङकी का एक माँ का जो करती है जतन अपनी बेटी के बालों के लिए कभी तेल की मालिश कभी आंवला शिकाकई से बालों को धोना एक लङकी एक माँ इन बालों के लिए क्या क्या नहीं करती ये सुंदर और मजबूत बाल बना देते है मजबूर जब खिंचकर चोटी को करता है कोई प्रहार ये बालों को नहीं नोचता है कोई बल्कि अंदर बैठी लङकी को उसके विश्वास को जो कहता है तुम सुंदर हो निकालकर कुचलकर फेंक देता है