ये मरासिम यकीनन जावेदानी हैं,कहां रब्त ऐसा इस अधूरी क़ाएनात में।ये चांद, तारे, किताबें, ग़ज़लें और फसाने कुछ,ये सब हमसफ़र हैं मेरे राह-ए-हयात मे।
ये मरासिम यकीनन जावेदानी हैं,कहां रब्त ऐसा इस अधूरी क़ाएनात में।
ये चांद, तारे, किताबें, ग़ज़लें और फसाने कुछ,ये सब हमसफ़र हैं मेरे राह-ए-हयात मे।