जब तक शब्दों का जंजाल होगा, मन में लाखों सवालों का सैलाब होगा, हर सोच को शब्दों में सज़ाया जाएगा, जब कलमो में स्याही का उबाल आएगा, कवियों की न कमी रहेगी तब, कविशाला ऊँचा उठता रहेगा यूँ ही अब ।