=====पापा को समर्पित =====

हे महाप्राण ,

किस अनन्त क्षितीज मे तुम विलीन हो गये।

पंच तत्वो मे ,परमतत्व मे लवलीन हो गये।

नौ दशक की ओर बढते कदम

सतत् संघर्ष की ओर चलते कदम।

हे अनंत यात्रा के पथिक, तुझे कोटि प्रणाम।

एक सुदृढ विटप के समान, अपनी छतनार छाया तले हम सबो को सीचंते रहे, अशीषते रहे ।

शुभमस्तु नित्यम् की ध्वनि मन प्राण मे गूजं रही।

हमे आशीष दे, अपने पुंजीभूत अनुभवों का ।

हम शाखा प्रशाखा पत्र पुष्प आपके, 

अपने अपने अस्तित्व के साथ,

अपने अपने चक्रव्यूह के साथ ।

हे पिता ,ज्येष्ठ पुरूष, महारथी, कर्मयोगी ।

माॅगते है, आशीष तुमसे, अपने वरद हस्त से ।

इस कठोर यथार्थ धरातल पर सुदृढ होकर , अपनी जीवन यात्रा पर चल सकें।

ग्रहण करो हमारी श्रद्धांजलि ,।

नवल किसलय ,नये पत्र पुष्प पल्लव,

श्रद्धावनत ,माॅगते हैं तुमसे,

तुम्हारी छतनार छाया का एक बिन्दू।

लहौ कोटि प्रणाम, लहौ कोटि प्रणाम।

             वन्दना कुमार, रांची